मंगलवार, जनवरी 25, 2011

एक का सिक्का

खौलते तेल में पड़ी मैदे की पहली बूंद से ही
अपने एक के सिक्के के सार्थक होने  का प्रमाण मिला
कडाही के तल में दिखते अपने पूरे चेहरे में
उस समय की सबसे  बड़ी खुशी का अहसास मिला
वो एक का सिक्का
जो मेरे जैसे बहुतो  को खुशिया देने वाला था
कई बार बड़े बड़े विवादों का कारण भी बन जाता था
उसे मंदिर में चढ़ाकर हर कोई मुराद पूरी करने को कह जाता था
पर मैं तो उसकी जलेबिया खाकर फिर उसका इंतजार करता
हर उसे पाने को अलग अलग कारण बताने होते  थे
सिर्फ उसे ही बचा लेने पर मंडियों में लोग गर्व महसूस करते
मैं अकेला ही नहीं मेरे सारे दोस्त उसे पाने को घर में रोते थे
सिर्फ उसके ही जुड़ जाने से ढेरो पैसे सगुन बन जाया करते
आज मेरे और मेरे जैसे बहुतो के लिए वो भले ही महत्व हीन  हो
फिर भी कई आँखे अभी भी उसी के लिए
तरस रही है जिससे वो भी
देख सके खौलते तेल की कडाही में
अपनी सबसे बड़ी खुशी पाने की आश वाला पूरा चेहरा

शैलेन्द्र ऋषि  







 






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