मंगलवार, जनवरी 25, 2011

चाँद का साथी

जैसे ही चाँद की दस्तक  हुई
उसका साथ निभाने आया वो तारा
चाँद  से थोड़ी ही दूर दिखता
थोडा महत्वहीन इरादों का नेक  वो तारा
लगातार चलने वाली रातो में
अपनी दो चार बातों से चांद का दिल बहला देने वाला  वो तारा
कुछ मामलो में पूरा तो कुछ में अधूरा
चाँद की आदतों को जानने वाला  वो तारा
आसमा में और तारो के आ जाने पर
चाँद को दूसरो में रमा देखता वो तारा
फिर भी हर रोज चाँद की तन्हाईयो में
कुछ उससे जुडी तो कुछ दूसरो से जुडी
हँसाने , रुलाने , सिखाने , वाली बातें करता वो तारा
अपने ही जैसे हज़ार मित्रों में
कुछ करीब कुछ दूर  कुछ दूर से थोडा दूर
चांद की मुस्कराहट  पर तन्हाई में खुश
मुस्कान बिखेरता वो तारा
चाँद के कामो को पूरा करने में
खुद को व्यस्त रखता वो तारा
चाँद के बिना भी आसमा में दिखता
चाँद की इच्छा पूरी करने उसके इंतजार में
अपनी हज़ार कोश फैलती चमक में
अपने आसुओ को छिपाता
वो अकेला तारा , चाँद का साथी वो तारा .

शैलेन्द्र शर्मा ऋषि
 
     












 



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